अपनी धुन मे रहता हूँ
मे भी तेरे जेसा हूँ
अो पिछली रुत के साथी
अब के बरस मे तनहा हूँ
तेरी गली मे सारा दिन
दुःख के कंकर चुनता हूँ
मुझसे आखे मिलाये कौन
मे तेरा खाली कमरा हूँ
तू जीवन की भरी गली
मैं जंगल का रास्ता हूँ
अपनी लहर मैं अपना रोग
दरिया हूँ और प्यासा हूँ
आती रुत मुझे रोएगी
जाती रुत का झोका हूँ
अपनी भाषा में देखो
Saturday, 3 May 2008
अपनी धुन मे रहता हू
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