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Saturday, 3 May 2008

अपनी धुन मे रहता हू

अपनी धुन मे रहता हूँ
मे भी तेरे जेसा हूँ

अो पिछली रुत के साथी
अब के बरस मे तनहा हूँ

तेरी गली मे सारा दिन
दुःख के कंकर चुनता हूँ

मुझसे आखे मिलाये कौन
मे तेरा खाली कमरा हूँ

तू जीवन की भरी गली
मैं जंगल का रास्ता हूँ

अपनी लहर मैं अपना रोग
दरिया हूँ और प्यासा हूँ

आती रुत मुझे रोएगी
जाती रुत का झोका हूँ

चाहत

तेरे लबों से है रंगत फोलों में
तेरी आंखों से है चमक सितारों में

तू जो मुस्कुराके देख ले आसमान को
चाँद भी शरमाके झुक जाए तेरे क़दमो में

दुनिया में लाखों हसीं हैं
तू एक हसीन है लाखों में

सो रहे थे जज्बात मेरे तेरे दीदार से पहले
तुझे देख कर जागी है मोहब्बत इस दिल में

जो तुम मिल गई अगर मुझ को आये सनम
रोनक हो जायेगी मेरी जिंदगानी में

मैंने तेरे प्यार में दिलको ज़ख्मी कर लिया है
अब तो चुपाले मुझको अपने आँचल की आड़ में

कुबूल कर मेरे प्यार को आये जाने -ऐ -फसीह
न मिलेगा मुझ जैसा आशिक सारी दुनिया में